मन की बात के माध्यम से जनजातीय विद्यार्थियों की सांस्कृतिक भागीदारी एवं मानसिक विकास पर प्रभाव
रेडियो की विकास यात्रा में सर्वप्रथम स्टेट ब्रॉडकास्टिंग सेवा दिनांक 1 अप्रैल 1930 को प्रारंभ की गई, इसके पश्चात् 1936 में ऑल इंडिया रेडियो की स्थापना हुई। ऑल इंडिया रेडियो का नामकरण 1997 में आकाशवाणी कर दिया गया। दिनांक 23 नवंबर 1997 को भारतीय प्रसारण निगम की स्थापना की गई। भारतीय प्रसारण निगम ने भारत के जनसाधारण के लिए आकाशवाणी द्वारा प्रसारित सामान्यजन की रुचि के प्रोग्राम जिसमें खेती-बाड़ी, समाचार, "मन की बात" मंच प्रदान करने में सराहनीय कदम उठाए गए।
भारत की जनजातीय आबादी सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है, परंतु शैक्षिक एवं संचार संसाधनों की सीमित उपलब्धता के कारण जनजातीय विद्यार्थियों तक राष्ट्रीय विमर्श अपेक्षाकृत कम पहुँच पाता है। मन की बात जैसे जनसंचार कार्यक्रम जनजातीय विद्यार्थियों को न केवल राष्ट्रीय विचारधारा से जोड़ते हैं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान, आत्मविश्वास एवं मानसिक विकास को भी प्रभावित करते हैं। यह लेख मन की बात कार्यक्रम के जनजातीय विद्यार्थियों पर पड़ने वाले सांस्कृतिक एवं मनोवैज्ञानिक प्रभावों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है।
संवाद एक सतत प्रक्रिया है जिसके माध्यम से विचारों को दिशा मिलती है। समाज की इसी प्रक्रिया को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने "मन की बात" कार्यक्रम द्वारा एक क्रांतिकारी दिशा दी है। मन की बात जैसा की शीर्षक में ही उल्लेखित है मन के उद्गारों का संप्रेषण। यह उद्गार सीधे दिल की गहराइयों से निकलकर एक वृहद् समाज में जनचेतना का काम कर रहे हैं। मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री देश के लोगों से संवाद कायम करते हैं हमारे लिए यह गौरव की बात है कि इस कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कई बार राज्य सरकारों, प्रदेशवासियों, विद्यार्थियों और समाज के हर वर्ग के उत्कृष्ट कार्यों का उल्लेख किया है। उनका यह संबोधन हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
1.भूमिका - जनजातीय समाज परंपरागत रूप से मौखिक संस्कृति, लोकज्ञान एवं सामुदायिक जीवन पर आधारित रहा है। आधुनिक संचार माध्यमों, विशेषकर रेडियो, ने जनजातीय क्षेत्रों में सूचना और विचारों के आदान-प्रदान को नया आयाम दिया है। मन की बात कार्यक्रम इसी संदर्भ में एक प्रभावशाली माध्यम बनकर उभरा है, जो जनजातीय विद्यार्थियों को सामाजिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त बनाने की क्षमता रखता है।
2.मन की बात: एक संक्षिप्त परिचय- मन की बात भारत सरकार द्वारा प्रसारित एक मासिक रेडियो कार्यक्रम है, जिसमें सामाजिक विषयों, शिक्षा, संस्कृति, पर्यावरण और युवाओं की भूमिका पर चर्चा की जाती है। जनजातीय क्षेत्रों में रेडियो की सुलभता के कारण यह कार्यक्रम विद्यार्थियों तक आसानी से पहुँचता है और उनके दैनिक जीवन को प्रभावित करता है।
3.जनजातीय विद्यार्थियों की सांस्कृतिक भागीदारी-
3.1 सांस्कृतिक पहचान का सुदृढ़ीकरण- मन की बात में जब लोकसंस्कृति, आदिवासी परंपराओं, नायकों और जनजातीय योगदानों का उल्लेख होता है, तो जनजातीय विद्यार्थियों में:
*अपनी संस्कृति के प्रति गौरवबोध
*सामाजिक पहचान की स्वीकृति
*परंपराओं के संरक्षण की चेतना का विकास होता है।
भारत सरकार द्वारा कई राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों जैसे एनसीईआरटी, सीबीएसई, यूजीसी, इग्नू और एनआईओएस इत्यादि के माध्यम से विशेष रूप से कोविड-19 अवधि के दौरान कई राष्ट्रव्यापी डिजिटल शैक्षिक कार्यक्रम चलाए गए हैं। करोड़ों बच्चों की निर्बाध शिक्षा का समर्थन करने के लिए निष्ठा, ई-पाठशाला, एनआरओईआर, निपुण भारत अभियान, पीएम ई-विद्या, स्वयंप्रभा, दीक्षा इत्यादि कार्यक्रमों के माध्यम से गुणवत्ता और सार्वभौमिक शिक्षा को पूरा करने में प्रौद्योगिकी के अधिकतम उपयोग ने योगदान दिया है।
3.2 राष्ट्रीय मंच से जुड़ाव- यह कार्यक्रम जनजातीय विद्यार्थियों को यह अनुभव कराता है कि उनकी संस्कृति और जीवनशैली राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा है। इससे उनकी सांस्कृतिक भागीदारी निष्क्रिय से सक्रिय होती है।
4.मानसिक विकास पर प्रभाव-
4.1 आत्मविश्वास एवं अभिव्यक्ति
कार्यक्रम में प्रेरक कथाएँ, युवाओं के उदाहरण और सामाजिक योगदान की चर्चा:
आत्मविश्वास बढ़ाती है
संवाद और अभिव्यक्ति कौशल को प्रोत्साहित करती है
4.2 सकारात्मक सोच और लक्ष्य-निर्धारण
जनजातीय विद्यार्थी मन की बात सेः
प्रेरणा प्राप्त करते हैं
शिक्षा के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करते हैं
भविष्य के लिए लक्ष्य निर्धारित करना सीखते हैं
5.शैक्षिक दृष्टि से प्रभाव
मन की बात कार्यक्रम:
*विद्यार्थियों में सुनने और समझने की क्षमता विकसित करता है
*समसामयिक विषयों की जानकारी देता है
*विद्यालयी शिक्षा के साथ अनौपचारिक शिक्षण का कार्य करता है
विशेषकर दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में यह कार्यक्रम एक पूरक शैक्षिक साधन के रूप में कार्य करता है।
6.जनजातीय क्षेत्रों में रेडियो की भूमिका
रेडियो आज भी जनजातीय समाज में सबसे विश्वसनीय माध्यम है।
मन की बात जैसे कार्यक्रम:
भाषा की सरलता के कारण आसानी से समझे जाते हैं
सामुदायिक स्तर पर सामूहिक श्रवण को बढ़ावा देते हैं
सामाजिक संवाद को सशक्त करते हैं।
7. चुनौतियाँ
यद्यपि मन की बात का प्रभाव सकारात्मक है, फिर भी कुछ चुनौतियाँ मौजूद हैं:
सभी जनजातीय भाषाओं में सामग्री की अनुपलब्धता
विद्यार्थियों के अनुभवों को सीधे शामिल करने की सीमित संभावना
सभी जनजातीय भाषाओं में सामग्री की अनुपलब्धता
विद्यार्थियों के अनुभवों को सीधे शामिल करने की सीमित संभावना
स्थानीय उदाहरणों की सं यूख्या कम होना
मन की बात का विद्यार्थियों पर प्रभाव - मन की बात ने आम लोगों एवं विद्यार्थियों के मन में स्थान बना लिया है। यह चिंतनशील प्रधानमंत्री के विचारों का पुंज है मन की बात जनजातीय विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शी और प्रभावशाली सिद्ध हुआ है। विद्यार्थी चाहे जनजाति हो या गैर जनजातीय सबके जीवन में समस्याएं एवं परेशानियां होती है कई बार अनावश्यक परेशानियों की गिरफ्त में आ जाते है उनकी समझ में नहीं आता की परेशानियां और समस्याओं से कैसे निपटा जाए। देखा जाए तो कुछ हद तक यह समस्या वास्तव में होती हैं जबकि कई बार छात्र उनके होने का भ्रम पाल लेते हैं। परिणामतः वह तनाव में आ जाते हैं और इस तनाव के चलते कई बार अपने लक्ष्य से भटक जाते हैं। इन समस्याओं से निजात पाने और जीवन को एकाग्र करते हुए लक्ष्य की ओर बढ़ने में माननीय प्रधानमंत्री जी नरेंद्र मोदी जी ने मन की बात कार्यक्रम द्वारा एक क्रांतिकारी दिशा दी है।
मन की बात के अब तक के सफर में ग्रामीण क्षेत्र में जनजातीय विद्यार्थियों को प्रभावित किया है और समस्या समाधान में उनका मार्गदर्शन किया है।
9.सुझाव
*जनजातीय भाषाओं में विशेष संस्करण
*जनजातीय विद्यार्थियों की कहानियों को कार्यक्रम में स्थान
*विद्यालय स्तर पर मन की बात आधारित चर्चा सत्र
निष्कर्ष - मन की बात कार्यक्रम जनजातीय विद्यार्थियों के सांस्कृतिक सशक्तिकरण और मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह उन्हें न केवल राष्ट्रीय चेतना से जोड़ता है, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान, आत्मसम्मान और शैक्षिक दृष्टिकोण को भी सुदृढ़ करता है। यदि इसे और अधिक जनजातीय-केंद्रित बनाया जाए, तो यह कार्यक्रम आदिवासी युवाओं के सर्वांगीण विकास का प्रभावी माध्यम बन सकता है। मन की बात कार्यक्रम से समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाने के प्रयासों के साथ माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदीजी ने आम जनता से सत्ता के संपर्क की उस परंपरा को भी पुनर्स्थापित किया, जिसे पूर्व में भुला दिया गया था। सरकार का कर्तव्य केवल कानून बनाना या संसद में सांसदों के माध्यम से उठाएं गये सवालों का जवाब देना नहीं है। उनका यह भी दायित्व है कि वह जनता के बीच पहुंचे और उनके उन छोटे-छोटे किंतु बुनियादी सवालों का भी सामना करें और उनके निदान की दिशा में प्रयास करें। मन की बात का देश के सभी वर्गों के विद्यार्थियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा है। जनजातीय विद्यार्थी भी मन की बात से प्रेरणा लेकर अनुशासित होकर अध्ययन की और अग्रसर हो रहे है।
संदर्भ ग्रंथ सूची -
1.भारत सरकार, मन की बात कार्यक्रम अभिलेख
2.वर्मा, रामकुमार — जनजातीय समाज और संचार माध्यम
3.Xaxa, Virginius — Tribal Education in India
4.NCERT — Tribal Studies and Education
5.कृष्णकुमार (2010) "दृश्य-श्रव्य एवं जनसंचार माध्यम" राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी जयपुर पृ.सं. 118-119
6.संजीव भानावत (2010) "भारत में संचार माध्यम" राजस्थान हिंदी ग्रंथ अकादमी जयपुर पृ.सं. 233-240
7.2 नवंबर – 2014
*22 फरवरी – 2015
*22 फरवरी – 2016
*31 मई – 2015
*28 फरवरी – 2016
शोधार्थी
मुकेश निनामा
हिन्दी विभाग
गोविन्द गुरू जनजातीय विश्वविद्यालय,
बाँसवाड़ा (राजस्थान)
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