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डामोर जनजाति: इतिहास, संस्कृति एवं कला का एक समग्र अध्ययन

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  सारांश  -  भारत की जनजातीय संस्कृति उसकी बहुलतावादी सामाजिक संरचना का महत्वपूर्ण आधार है। डामोर जनजाति, जो भील जनजातीय समूह की एक प्रमुख उप जनजाति है, पश्चिमी भारत विशेषकर राजस्थान, गुजरात एवं मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास करती है। यह शोध-पत्र डामोर जनजाति के ऐतिहासिक विकास, सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन, कला परंपराओं, धार्मिक विश्वासों तथा समकालीन चुनौतियों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि डामोर जनजाति की संस्कृति प्रकृति-आधारित जीवन दर्शन, सामुदायिक सहभागिता और पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों पर आधारित है। वर्तमान समय में आधुनिकीकरण, शहरीकरण एवं वैश्वीकरण के प्रभाव से इस जनजाति की सांस्कृतिक पहचान पर संकट उत्पन्न हो रहा है। अतः इस शोध का उद्देश्य डामोर जनजाति की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण एवं प्रलेखन की आवश्यकता को रेखांकित करना है। मुख्य शब्द : डामोर जनजाति, भील, जनजातीय संस्कृति, लोक कला, स्वदेशी ज्ञान प्रणाली, सांस्कृतिक संरक्षण भूमिका -  भारत को जनजातियों का देश कहा जाता है, जहाँ विविध भौगोलिक, भाषाई और सांस्कृतिक परिवेश म...