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गरासिया जनजाति में स्वदेशी ज्ञान प्रणालियां: संरक्षण, प्रलेखन, चुनौतियां एवं समाधान

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  सारंश (Abstract)      भारत की जनजातीय संस्कृतियाँ स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों की समृद्ध परंपरा का प्रतिनिधित्व करती हैं। गरासिया जनजाति, जो मुख्यतः राजस्थान, गुजरात एवं मध्य प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में निवास करती है, प्रकृति-आधारित जीवनशैली, पारंपरिक कृषि, औषधीय ज्ञान, पर्यावरण संरक्षण एवं सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों के माध्यम से स्वदेशी ज्ञान का संरक्षण करती आई है। यह शोध पत्र गरासिया जनजाति की स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों का समग्र अध्ययन प्रस्तुत करता है तथा इनके संरक्षण, प्रलेखन से जुड़ी चुनौतियों एवं समाधान पर प्रकाश डालता है। अध्ययन यह प्रतिपादित करता है कि गरासिया जनजाति का पारंपरिक ज्ञान वर्तमान वैश्विक समस्याओं-जैसे जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता क्षरण एवं स्वास्थ्य संकट के सर में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कीवर्ड - गरासिया जनजाति, स्वदेशी ज्ञान प्रणालियांः संरक्षण, प्रखेलन चुनौतियां, समाधान भूमिका- भारत की जनजातीय संस्कृति विश्व की प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है। इन जनजातियों द्वारा विकसित स्वदेशी ज्ञान प्रणालियां (Indigenous Knowledge Systems - IKS) प...

राजस्थान की प्रमुख आदिवासी भील और गरासिया जनजातियों के वाद्य यंत्र और उनका सांस्कृतिक महत्व

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     राजस्थान की आदिवासी जनजातियां भारत की आदिम जनजातियां हैऔर देश की सभ्यता एवं संस्कृति  को बनाए रखने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। जनजातियों के लोक गीतों एवं नृत्यों में वाद्य यंत्रों का स्थान सर्वोपरि है। राजस्थान की आदिवासी जनजातियों (भील, मीणा, डामोर गरासिया आदि) के प्रमुख वाद्य यंत्रों में मांदल (मिट्टी का ढोल), ढोल, कुंडी, थाली, शहनाई, पवारी (सींग व लकड़ी का वाद्य), और डोवला (बांसुरीनुमा) शामिल हैं, जो उनके पारंपरिक गीतों, नृत्यों (जैसे गवरी) और धार्मिक अनुष्ठानों का अभिन्न अंग हैं, हालांकि आधुनिकता के प्रभाव से इनका प्रचलन कम हो रहा है।      राजस्थान के लोक संगीत में यहाँ के लोकवाद्यों का महत्वपूर्ण स्थान है। इनके प्रयोग से गीतों व नृत्यों में माधुर्य वृद्धि होतो है साथ ही वातावरण एवं भावाभिव्यक्ति प्रभावशाली बनती है। यहाँ के परिवेश, स्थिति व भावों के अनुरूप लोक वाद्यों का प्रचुर विकास हुआ है।  भील जनजाति के प्रमुख लोक वाद्य यंत्र -      भारत की आदिवासी संस्कृति में संगीत और वाद्य यंत्र केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि...