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दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी समुदाय पर वैश्वीकरण एवं आधुनिकता का प्रभाव (एक सामाजिक-सांस्कृतिक अध्ययन)

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       वैश्वीकरण और आधुनिकता ने विश्व के प्रत्येक समाज को किसी न किसी रूप में प्रभावित किया है। भारत का आदिवासी समाज, विशेषकर दक्षिणी राजस्थान के भील, मीणा, गरासिया एवं डामोर समुदाय, इस परिवर्तन से अछूते नहीं रहे हैं। परंपरागत जीवन-पद्धति, लोकसंस्कृति, सामाजिक संरचना तथा आर्थिक गतिविधियों में बीते कुछ दशकों में तीव्र परिवर्तन देखने को मिलता है। यह लेख दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी समाज पर वैश्वीकरण एवं आधुनिकता के सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रभावों का विश्लेषण प्रस्तुत करता है।       दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी समुदाय में मुख्यत भील, गरासिया, डामोर और मीणा जनजातियों को सम्मिलित किया गया है। दक्षिणी राजस्थान शिक्षा, साक्षरता और विकास की दृष्टि से शेष राजस्थान से कम ही विकसित हो पाया है जिसका मुख्य कारण शिक्षा का अभाव रहा है।  पारंपरिक रूप से आदिवासी लोग  प्रकृति-आधारित जीवन, सामुदायिक सहयोग, लोकगीत-नृत्य और अपने विशिष्ट सांस्कृतिक तंत्र के लिए जाने जाते  है। पिछले तीन दशकों में  वैश्वीकरण और आधुनिकता (Modernization) की प्रक्रिय...