पंचायत स्तर पर जनजातीय महिलाओं की भागीदारी: चुनौतियां और संभावनाएं
प्रस्तावना- भारत की ग्राम-आधारित लोकतांत्रिक व्यवस्था में पंचायती राज संस्थाएँ शासन की सबसे निचली, लेकिन सबसे प्रभावी इकाइयाँ हैं। इन्हीं संस्थाओं के माध्यम से स्थानीय विकास, सामाजिक न्याय और सहभागी लोकतंत्र को वास्तविक रूप मिलता है। भारत के कुल जनसंख्या का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जनजातीय समाज से आता है, जिनकी सामाजिक-सांस्कृतिक संरचना विशिष्ट रही है। इस समाज में महिलाओं की भूमिका परंपरागत रूप से महत्वपूर्ण रही है, किंतु औपचारिक राजनीतिक संरचनाओं में उनकी भागीदारी लंबे समय तक सीमित रही। 73वें संविधान संशोधन के बाद पंचायतों में महिलाओं के लिए आरक्षण तथा अनुसूचित जनजातियों के लिए पृथक प्रावधानों ने जनजातीय महिलाओं को स्थानीय शासन में प्रवेश का अवसर प्रदान किया। इसके बावजूद, जमीनी स्तर पर अनेक संरचनात्मक, सामाजिक और आर्थिक चुनौतियाँ बनी हुई हैं। प्रस्तुत लेख में पंचायत स्तर पर जनजातीय महिलाओं की भागीदारी की वर्तमान स्थिति, मुख्य चुनौतियाँ तथा भविष्य की संभावनाएँ का विश्लेषण किया गया है। पंचायती राज व्यवस्थाः एक संक्षिप्त परिचय- पंचायती राज व्यवस्था भारत में स्थानीय स्वशासन की स...