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भील जनजाति के 10 प्रमुख नृत्य और उनकी विशेषताएं

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    भील  जनजाति राजस्थान और मध्यप्रदेश की प्रमुख जनजाति है। भील जनजाति के जीवन दर्शन में जीवन की मुस्कान, प्रकृति का वैभव, मनुष्य की सौन्दर्य-उपासना और मन की बंधन-मुक्त उड़ान के दर्शन होते हैं। राजस्थान की जनजातीय सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक स्थल अत्यंत समृद्ध है जिसमें निश्चल जीवन का आह्लाद और संघर्ष प्रतिबिंबित है। जनजातीय जीवन शैली में आलोकित आनन्द समूचे प्रदेश की ऊर्जा और उसका दैनदिन संघर्ष सभी प्रदेशवासियों की प्रेरणा है।     राजस्थान के भील जनजातीय  समुदाय अथवा समाज की जीवन शैली, खानपान परिधान रहन-सहन, मान्यताएं, परंपराएं, प्रथाएं, लोककथाएं, लोक विश्वास, धार्मिक आस्था, अनुष्ठान, पर्व, त्यौहार, सामाजिक व्यवहार, नियम बंधन, संस्कार, लोकगीत, लोकनृत्य, औषधि ज्ञान एवं पारिस्थितिकीय ज्ञान अनुपम और अमूल्य धरोहर है। पड़ौसी राज्यों गुजरात तथा मध्यप्रदेश से सांस्कृतिक समरसता के कारण जनजातीय संस्कृति इंद्रधनुषी घटाओं से सुसज्जित है।    भील जनजाति केके नृत्य "पर सुखाय" न होकर " स्वान्तः सुखाय" अधिक होते हैं। एक ओर यदि इनमें श्रृंगार रस पल्लवित होता है ...