डायन प्रथा एवं आदिवासी महिलाओं के मानवाधिकार
डायन डायन प्रथा एवं आदिवासी महिलाओं के मानवाधिकार- डायन प्रथा एक सामाजिक कुप्रथा है, जिसमें किसी महिला पर जादू-टोना करने या अनिष्टकारी शक्तियों का प्रयोग करने का आरोप लगाकर उसे प्रताड़ित किया जाता है। यह प्रथा विशेष रूप से आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास, अशिक्षा तथा सामाजिक असमानताओं के कारण देखने को मिलती है। डायन घोषित की गई महिलाओं को सामाजिक बहिष्कार, शारीरिक हिंसा और मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, जो उनके मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। आदिवासी समाज में डायन प्रथा- आदिवासी समुदायों में बीमारी, अकाल मृत्यु, फसल खराब होने या अन्य दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं का कारण कभी-कभी किसी महिला को "डायन" मानकर बताया जाता है। अधिकांश मामलों में विधवा, वृद्ध, अकेली या आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को निशाना बनाया जाता है। मानवाधिकारों का उल्लंघन- डायन प्रथा निम्नलिखित मानवाधिकारों का हनन करती है: 1. जीवन के अधिकार का उल्लंघन- डायन घोषित महिलाओं को हिंसा, यातना और कभी-कभी हत्या का सामना करना पड़ता है। 2. समानता के अधिकार का उल्लंघन-...