PESA ACT1996: ग्राम सभा के अधिकार और आदिवासी स्वशासन की संवैधानिक व्यवस्था


प्रस्तावना (Introduction)- भारत एक बहु-जातीय और बहु-संस्कृतिक देश है, जहाँ आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक परंपराएँ रही हैं। स्वतंत्रता के बाद पंचायती राज व्यवस्था को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 73वाँ संविधान संशोधन किया गया, परंतु यह व्यवस्था पूर्ण रूप से आदिवासी क्षेत्रों की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं थी। इसी कमी को दूर करने के लिए पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996, जिसे सामान्यतः PESA Act कहा जाता है, लागू किया गया।
   
मुख्य शब्द (Keywords): PESA Act, ग्राम सभा, अनुसूचित क्षेत्र, आदिवासी स्वशासन, लोकतांत्रिक
PESA Act 1996 क्या है?
   ।PESA Act 1996 एक केंद्रीय कानून है, जिसका उद्देश्य संविधान की पाँचवीं अनुसूची में आने वाले अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायती राज संस्थाओं को स्थानीय परंपराओं और आदिवासी जीवन पद्धति के अनुसार सशक्त बनाना है।

यह अधिनियम मुख्य रूप से इन राज्यों पर लागू होता है:
• मध्य प्रदेश
• राजस्थान
• गुजरात
• महाराष्ट्र
• छत्तीसगढ़
• झारखंड
• ओडिशा
• आंध्र प्रदेश
• तेलंगाना
.हिमाचल प्रदेश

PESA Act के प्रमुख उद्देश्य- 
1.आदिवासी समाज को स्वशासन का अधिकार देना।
2.ग्राम सभा को निर्णय-निर्माण की केंद्रीय संस्था बनाना।
3.जल, जंगल और जमीन पर सामुदायिक अधिकार       सुनिश्चित करना।
4.परंपरागत कानूनों और सामाजिक रीति-रिवाजों को      मान्यता देना।
ग्राम सभा की भूमिका और शक्तियाँ- 
PESA Act के अंतर्गत ग्राम सभा को अत्यंत महत्वपूर्ण अधिकार दिए गए हैं:
A.प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार- 
• जल स्रोतों का संरक्षण
• वनों की सुरक्षा
• भूमि हस्तांतरण पर नियंत्रण
B.विकास योजनाओं की स्वीकृति- 
• किसी भी विकास परियोजना से पहले ग्राम सभा की        सहमति अनिवार्य।
• स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजना निर्माण
 C.परंपरागत न्याय व्यवस्था- 
• सामाजिक विवादों का समाधान
• आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार न्याय
 लघु वन उपज (MFP)- 
• तेंदूपत्ता, महुआ, लाख आदि पर सामुदायिक अधिकार

PESA Act और आदिवासी स्वशासन- PESA Act आदिवासी स्वशासन की अवधारणा को कानूनी मान्यता देता है। यह अधिनियम स्वीकार करता है कि आदिवासी समाज सदियों से अपनी आंतरिक प्रशासनिक प्रणाली के माध्यम से स्वयं का शासन करता आया है।
यह कानून- 
*पारंपरिक नेतृत्व को सम्मान देता है।
*समुदाय आधारित निर्णय प्रणाली को मजबूत करता है।
*सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित करता है।

PESA Act का सामाजिक-आर्थिक प्रभाव- 
A.सामाजिक प्रभाव- 
• सामुदायिक एकता में वृद्धि
• महिलाओं की भागीदारी में सुधार
• सांस्कृतिक संरक्षण
B.आर्थिक प्रभाव- 
• स्थानीय आजीविका के अवसर
• संसाधनों का सतत उपयोग
• बाहरी शोषण में कमी

PESA Act और वन अधिकार अधिनियम (FRA 2006)- PESA Act और FRA दोनों कानून ग्राम सभा को केंद्र में रखते हैं। जहाँ PESA प्रशासनिक अधिकार देता है, वहीं FRA वन संसाधनों पर कानूनी स्वामित्व प्रदान करता है। दोनों मिलकर आदिवासी सशक्तिकरण की मजबूत नींव रखते हैं।

PESA Act के क्रियान्वयन में चुनौतियाँ- 
*राज्यों द्वारा नियमों का अधूरा निर्माण
*प्रशासनिक जागरूकता की कमी
*ग्राम सभाओं को अधिकारों की जानकारी न होना

निष्कर्ष (Conclusion)- PESA Act 1996 भारतीय लोकतंत्र में आदिवासी समाज को सशक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। यह कानून न केवल स्वशासन को बढ़ावा देता है, बल्कि आदिवासी संस्कृति, परंपरा और संसाधनों की रक्षा भी करता है। यदि इसे प्रभावी रूप से लागू किया जाए, तो यह अधिनियम सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का मजबूत आधार बन सकता है।

References (संदर्भ सूची)- 
1.Government of India (1996). The                  Provisions of the Panchayats                         (Extension   to the Scheduled Areas)            Act.
2.संविधान सभा, भारत का संविधान.
3.ICSSR (Various Reports on Tribal                 Governance).
5.Xaxa, V. (2014). State, Society and               Tribes. Pearson.
6.Ministry of Panchayati Raj, Government       of India Reports.


Frequently Asked Questions (FAQ)- 
Q1. PESA Act किस वर्ष लागू हुआ?
👉 1996

Q2. PESA Act कहाँ लागू होता है?
👉 संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले       क्षेत्रों में

Q3. PESA Act का मुख्य उद्देश्य क्या है?
👉 आदिवासी स्वशासन और ग्राम सभा को सशक्त            बनाना


                Dr. kantilal Ninama 
                 Lecturer - History 
                 Govt. College Ghatol
             Banswara Rajasthan 

टिप्पणियाँ

बेनामी ने कहा…
Very good nice article sirji

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